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नई मार्कशीट तैयार करने की जिम्मेदारी बरेली को मिली है। रिपोर्ट कार्ड में मुख्य विषयों के पाठ्य सहगामी अंकों के साथ-साथ और व्यक्तित्व मूल्यांकन के ब्रेड भी होंगे। अभी तक सीबीएसई स्कूलों में ही पाठ्य सहगामी और व्यक्तित्व मूल्यांकन के ग्रेड मार्कशीट पर दर्ज किए जाते थे। शासन ने अभी प्रस्तावित रिपोर्ट कार्ड पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है, मगर जो रिपोर्ट कार्ड तैयार किए गए हैं, लगभग उनको ही फाइनल होना है। नए रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रही टीम के सदस्य ने बताया, प्रस्तावित मार्कशीट को मुख्य रूप से दो हिस्सों में विभाजित किया गया है। एक हिस्से में शैक्षिक मूल्यांकन दर्ज होगा तो दूसरे हिस्से में पाठ्य सहगामी गतिविधियों के अंक शामिल किए जाएंगे। इनमें सहपाठियों से व्यवहार, शिक्षकों से व्यवहार, सामाजिक कार्य, स्वभाव, शिष्टाचार, आत्मविश्वास पहल की प्रवृत्ति, संतुलन, अनुशासन, समय की पाबंदी, जैसे बिंदु शामिल किए गए हैं। इन बिंदुओं पर श्रेष्ठ, श्रेष्ठतर और श्रेष्ठतम वर्ग में ग्रेड दिया जाएगा। त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक के होंगे अंक मार्कशीट पर छात्रों की आचार संख्या मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को भी प्रस्तावित किया गया है। कक्षा छह से आठवीं तक की मार्कशीट में शैक्षिक मूल्यांकन तीन हिस्सों में किया जाएगा। इसमें त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक आधार पर अंक दिए जाएंगे। इसके बाद ही कुल अंकों का योग होगा।
ऑनलाइन आवेदन के लिए शैक्षिक अर्हता, आयु, आवेदन शुल्क,चयन का मानक एवं अन्य शर्तों सहित सामान्य परिचालन संबंधित तकनीकी दिशा निर्देश वेबसाइट https://updled.gov.in/ पर उपलब्ध हैं। ऑनलाइन आवेदन में अंकित प्रविष्टियों में संशोधन का अभ्यर्थियों को कोई मौका नहीं मिलेगा। डीएलएड प्रशिक्षण 2021 ऑनलाइन आवेदन के समय, पंजीकरण फार्म फाइनल सेव होने से पहले अपने ऑनलाइन प्रविष्टियों का मिलान, मूल अभिलेखों से अवश्य कर लें। अभ्यर्थियों को रजिस्ट्रेशन को फाइनल सेव करने से पहले घोषणा करनी होगी।
प्रदेश के सरकारी एवं निजी डीएलएड कॉलेजों में प्रवेश के लिए 20 जुलाई से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो रही है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश की ओर से ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 10 अगस्त रखी गई है। अभ्यर्थी वेबसाइट https://updled.gov.in/ पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से प्रदेेश के जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों (डायट), सीटीई वाराणसी एवं निजी डीएलएड प्रशिक्षण संस्थानों, जिन्हें एनसीटीई की ओर से मान्यता दिए जाने के बाद प्रदेश सरकार की ओर से संबद्घता दी गई है, में प्रवेश दिया जाएगा। अभ्यर्थी 11 अगस्त तक ऑनलाइन शुल्क जमा कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद पूर्ण आवेदन का प्रिंटआउट लेने की अंतिम तिथि 12 अगस्त रखी गई है।
डीएलएड प्रवेश 2021 के लिए आज से शुरू होगा पंजीकरण
7 th pay सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के सम्बंध में वेतन समिति का हुआ गठन, देखें संबंधित शासनादेश
E Pathshala के अंतर्गत दूरदर्शन पर आज दिनाँक 17.07.2021 को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा
इन इलाकों में किस-किस तारीख को रहेगा प्रभाव - कुशीनगर, बहराइच, लखीमपुर और आसपास के एक या दो इलाकों में 17 जुलाई तक। - कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बंदायूं और आसपास 17 से 18 जुलाई तक। - देवरिया, गोरखपुर, संत कबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, श्रावस्ती, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, बाराबंकी, कासगंज, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बंदायूं और आसपास के इलाके में 18 से 19 जुलाई तक।
मौसम विभाग बारिश होने की खबर तो जारी की है, साथ ही येलो अलर्ट जारी करके चेतावनी भी दी है कि कहीं कहीं अत्यधिक भारी बरसात के हालात बन रहे हैं। शुक्रवार को मौसम विभाग की ओर से अगले सोमवार तक के लिए चेतावनी जारी की गई है। जारी चेतावनी में कहा गया है कि भारी बरसात के कारण प्रभावित जिलों में निचले इलाकों में जलभराव, बिजली-यातायात प्रभावित होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
Wether Update 19 तक यूपी के विभिन्न जिलों में भारी बारिश की चेतावनी , जानिए कौन-कौन से है वो जिले
यूपी बोर्ड ने गत मंगलवार को माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर कक्षा 10 के छात्रों के रोल नंबर उपलब्ध कराए थे। छात्र पंजीकरण नंबर या फिर नाम, जिला, स्कूल कोड और जन्म तिथि के आधार पर अपना रोल नंबर जान सकते थे, लेकिन लोड के चलते यह ऑनलाइन व्यवस्था दो दिन भी क्रैश हो गई। इसके बाद बोर्ड ने रोल नंबर पता करने लिंक भी हटा दिया और स्कूलों के माध्यम से रोल नंबर देने की व्यवस्था की। बता दें कि कक्षा 12 के नॉमिनल रोल नंबर जनवरी-फरवरी में ही भेज दिए गए थे। वहीं कक्षा 10 के छात्रों के रोल नंबर स्कूलों की लॉगइन में दिखते हैं। अब बोर्ड ने कक्षा 10 के छात्रों के भी रोल नंबर भी भेज दिए हैं। ऐसे में उसने स्कूलों के माध्यम से रोल नंबर देने की व्यवस्था की है। अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य साहब लाल मिश्रा ने बताया कि छात्रों को कक्षा नौ और 11 के पंजीकरण कार्ड दे दिए गए हैं। जो नहीं आए उनके मोबाइल पर पंजीकरण संख्या उपलब्ध करा दी गई है। वे पंजीकरण संख्या के आधार पर रिजल्ट देख सकते हैं। बोर्ड यदि रोल नंबर देने को कहेगा तो वह भी कर दिया जाएगा। राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि बोर्ड के निर्देश होंगे तो जो रोल नंबर ऑनलाइन हमें उपलब्ध हैं, क्लास टीचर के माध्यम से छात्रों को बंटवा देंगे। यह सबसे सरल तरीका है। हर क्लास टीचर के पास उसके छात्रों के नंबर हैं। शुक्रवार को एक बार फिर बोर्ड ने माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर कक्षा 10 के रोल नंबर जानने की व्यवस्था शुरू कर दी। छात्र वेबसाइट पर दिए गए लिंक पर अपना पंजीकरण नंबर डालकर रोल नंबर पता कर सकते हैं।
लखनऊ। यूपी बोर्ड के कक्षा 10 और 12 के छात्रों को रोल नंबर अब स्कूलों के माध्यम से भी दिए जाएंगे। बोर्ड ने स्कूलों को रोल नंबर उपलब्ध करा दिए हैं। पहले बोर्ड ने ऑनलाइन व्यवस्था लागू कर सीधे छात्रों को रोल नंबर देने की व्यवस्था की थी, लेकिन लोड के चलते दो दिन में ही वेबसाइट क्रैश हो जाने से यह व्यवस्था ठप हो गई थी। हालांकि, स्कूलों से रोल नंबर देने की वैकल्पिक व्यवस्था के बाद शुक्रवार को फिर वेबसाइट दुरुस्त कर ऑनलाइन रोल नंबर जानने की व्यवस्था बोर्ड ने शुरू कर दी।
अब स्कूलों के माध्यम से भी छात्रों को दिए जाएंगे UP BOARD के ROLL NUMBER
चयनित शिक्षक अब नियुक्ति पत्र को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद, महानिदेशक स्कूल शिक्षा सहित सभी संबंधित अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं, उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। चयनित शिक्षकों को अब डर सता रहा है कि चयन के बाद कहीं सरकार की ओर से नियुक्ति पत्र जारी करने में तो कोई खेल नहीं हो रहा। कुछ छात्र ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद को भी नियुक्ति पत्र में देरी का आधार बता रहे हैं तो कुछ छात्र प्रमाण पत्रों के सत्यापन को देरी की वजह बता रहे हैं
चयनित शिक्षकों का कहना है कि उनके संघर्ष के बाद प्रदेश सरकार की ओर से 69000 शिक्षक भर्ती में खाली 6696 पदों पर भर्ती के लिए सूची जारी की। 28 एवं 29 जून को प्रदेश स्तर पर तीसरी काउंसलिंग कराई गई। काउंसलिंग के एक दिन पहले सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने घोषणा कर दी कि काउंसलिंग के बाद नियुक्ति पत्र के लिए बाद में तिथि जारी की जाएगी। जबकि इससे पहले सरकार की ओर से कहा गया था कि 28 एवं 29 जून को काउंसलिंग के बाद 30 जून को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाएगा।
परिषदीय विद्यालयों के लिए 69000 सहायक अध्यापक भर्ती की की तीसरी सूची में चयनित 6696 शिक्षकों ने नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर शुक्रवार को स्थानीय सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी एवं प्रदेश सरकार के मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के प्रतिनिधियों को मांगपत्र सौंपा। चयनित शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच कर अपनी मांग दोहराने के बाद उनके कार्यालय और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के कार्यालय को मांगपत्र सौंपा।
69000 Shikshak Bharti के चयनितों ने मांगा नियुक्ति पत्र
अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) शिविर कार्यालय लखनऊ सुत्ता सिंह को अपर निदेशक सीमैट के पद पर प्रयागराज स्थानांतरित किया गया है उन्हें निदेशक सीमैट का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अपर शिक्षा निदेशक राज्य परियोजना राज्य परियोजना कार्यालय गायत्री को प्रयागराज में प्रोफसर आईएएसई के पद पर स्थानांतरित किया गया है उन्हें संयुक्त शिक्षा निदेशक (बेसिक) प्रयागराज का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। प्रयागराज में अपर शिक्षा निदेशक ( बेसिक) के पद पर तैनात सरिता तिकरी को अपर परियोजना निदेशक के पद पर राज्य परियोजना कार्यालय. लखनऊ स्थानांतरित किया गया है।
लखनऊ। शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग के चार अधिकारियों का तबादला कर दिया है। राज्य शैक्षिक तकनीकों संस्थान उप्र की निदेशक ललिता प्रदीप को प्रयागराज में अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) के पद पर भेजा गया है तथा अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) शिविर कार्यालय लखनऊ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
बेसिक शिक्षा के चार अधिकारियों का तबादला
समिति का दायित्व - मुख्य सचिव समिति राज्य वेतन समिति-2016 की ऐसी सिफारिशों पर विचार करेगी जिन पर अभी निर्णय होना बाकी है। समिति पूर्व प्रकरण पर विचार-विमर्श कर अपनी संस्तुतियां कैबिनेट को देगी। कैबिनेट इस पर अंतिम फैसला करेगी। इससे कर्मचारियों की वर्षों से लंबित सेवा संबंधी प्रकरण पर निर्णय का रास्ता साफ हो गया है।
समिति में ये होंगे शामिल समिति में मुख्य सचिव अध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव कार्मिक और अपर मुख्य सचिव वित्त सदस्य होंगे। इसके अलाबा संबंधित बिभागों के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव भी सदस्य होंगे। विशेष सचिव वित्त (वेतन आयोग ) के सदस्य सचिव होंगे।
प्रदेश सरकार ने राज्य वेतन समिति-2016 की विभिन्‍न संवर्गों व कर्मचारी संगठनों की मांगों के संबंध में दी गई संस्तुतियों पर कार्यवाही के लिए मुख्य सचिव समिति का गठन कर दिया है। वित्त विभाग ने शुक्रवार को समिति गठन का आदेश जारी कर दिया। तीन वर्ष से इस समिति के गठन का इंतजार था। अमर उजाला ने इस समिति का गठन न होने से कर्मचारियों को रही पेरशानी का मामला प्रमुखता से उठाया था। प्रदेश सरकार ने केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों पर बिचार के लिए राज्य बेतन समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी अंतिम संस्तुति फरवरी-2018 में सौंपी थी। सरकार ने समिति की कई सिफारिशों पर विचार कर कैबिनेट से निर्णय भी कराए। लेकिन समिति की विभागों व संगठनों के काडर पुनर्गठन, वेतनमान उच्चीकरण आदि से जुड़े प्रत्यावेदनों के संबंध में दी गई संस्तुतियों पर विचार नहीं किया गया। सामान्यतः पूर्व में वेतन समिति की संबर्गों से संबंधित सिफारिशों पर निर्णय के लिए मुख्य सचिव समिति का गठन किया जाता रहा है। पर, इस बार तीन वर्ष तक मुख्य सचिव समिति का गठन नहीं हो सका जिससे बेतन विसंगतियों, काडर पुनर्गठन आदि से जुड़ी मांगों पर कार्यवाही नहीं हों सकी। इससे कर्मचारियों में नाराजगी थी। अमर उजाला ने बीते दो मार्च के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस खबर का संज्ञान लेकर मुख्य सचिव समिति की जानकारी तलब कर समिति के गठन के निर्देश दिए थे। बीच में पंचायत चुनाव से यह कार्यवाही प्रभावित हुई।
वित्त विभाग ने शुक्रवार को इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है।
लखनऊ : सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में राज्य सरकार की ओर से गठित वेतन समिति (2016) की जिन सिफारिशों पर सरकार ने अभी निर्णय नहीं किया है, उन पर विचार करके कैबिनेट को अपनी सिफारिश करने के लिए शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी है।
वेतन समिति की सिफारिशों पर विचार को समिति गठित, समिति के यह होंगे दायित्व
कस्तूरबा विद्यालयों में निकलीं शिक्षक भर्तियाँ , करें आवेदन
लखनऊ। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिक विद्यालय सुबंशीपुर बीकेटी में तैनात शिक्षिका सीता पाठक के बीए और बोएड के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। एडी बेसिक ने व कार्यकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सेवा समाप्ति का आदेश भी जारी कर दिया । एफआईआर दर्ज करने के भी आदेश दिए, लेकिन स्थानीय अधिकारी स्तर पर मामला दबा दिया गया। एडी बेसिक पीएन सिंह ने बताया कि गत 23 जून को सीता पाठक की सेवा समाप्ति के आदेश जारी किए गए। साथ ही एबीएसए बीकेटी को एफआईआर दर्ज करने के भी आदेश दिए, लेकिन उन्होंने इस पर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बताया कि बताया कि फर्जी शिक्षकों के मामलों में मुख्यमंत्री के आदेश पर पिछले कुछ महीने एसटीएफ ने जांच की। जांच में सीता पाठक का 1993 का बीए का अंकपत्र और 1996 का बीएड का अंकपत्र गड़बड़ मिला। इसकी सत्यता पुष्ट नहीं हो पाई। जिसके बाद एडी बेसिक ने उसकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया। उन्होंने बताया कि मामले को लेकर एबीएसए को एफआईआर दर्ज कराने को भी निर्देश दिए, लेकिन अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। एडी बेसिक ने साफ कहा है कि सेवा समाप्ति से पहले कई बार उसे अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया, लेकिन वह प्रस्तुत नहीं हुई। बताया जा रहा है कि उसका यह मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है।
फर्जी शिक्षिका पर नहीं दर्ज किया जा रहा केस, स्थानीय अधिकारी स्तर पर मामला दबा दिया
पत्र में कहा गया है कि आबेदकों का ओर से स्थानांतरण के आवेदन की तिथि 16 जुलाई बीत गई है। एडी माध्यमिक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि आवेदकों के स्थानांतरण आवेदन पत्र को अग्रसारित किए जाते समय यह देख लें कि आवेदक अल्पसंख्यक, स्थानीय निकाय. अथवा. वित्तविहीन विद्यालय में कार्यरत तो नहीं है। अल्पसंख्यक एवं. वित्तविहीन विद्यालय के शिक्षकों की ओर से भरे आवेदन किसी भी दशा में अग्रसारित न किए जाएं।
प्रयागराज। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों के स्थानांतरण की गलती ठीक करने के लिए अपर निदेशक माध्यमिक की ओर से सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों एवं जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिशा निर्देश जारी किया गया है।
स्थानांतरण के आवेदनों की गलतियां ठीक की जाएंगी
जातिसूचक गाली व चरित्रीक टिप्पणी के वायरल ऑडियो के मामले में परिषदीय गुरूजी पर गिरी गाज, जांच के बाद किये गए निलंबित
नियम है कि राजकीय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य वही शिक्षक बन सकते हैं, जिन्हें इंटर कालेज में कम से कम तीन वर्ष पढ़ाने का अनुभव हो। अनुभव प्रमाण पत्र संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वारा सत्यापित होना चाहिए, लेकिन उत्तर प्रदेश लॉकसेवा आयोग की पीसीएस-2018 की भर्ती में ऐसे शिक्षक भी प्रधानाचार्य पद पर चयनित हो गए, जो प्राइमर्ण में अध्यापक थे। कुछ की आयुसीमा व अनुभव भी कम था। आयांग की सारी दलीलें सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दीं। अब आयोग को नए सिरे से प्रधानाचार्य पद की भर्ती करनी होगी। उत्तर प्रदेश लॉकसेवा आयोग ने पीसीएस-2018 के तहत अलग-अलग पदों की 988 रिक्तियों की भर्ती निकाली थी। इसमें राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य के 83 पद शामिल थे। अंतिम परिणाम 11 सितंबर, 2020 को जारी हुआ। 976 अभ्यर्थी सफल हुए। मुख्य परीक्षा में 75 अभ्यर्थी चयनित हुए। चयनितों में 33 का सशर्त चयन किया गया था। भर्ती में गड़बड़ी का अंदेशा होने पर अभ्यर्थी अशोक कुमार ने जलालपुर आंबेडकरनगर के खंड शिक्षाधिकारी से आरंटीआइए के तहत एक अभ्यर्थी के बारे में जानकारी मांगी। उन्हें 10 नवंबर 2020 को जवाब मिला तो पता चला कि प्राथमिक विद्यालय मगुरडिला, विकास खंड जलालपुर व जिला आंबेडकरनगर में कार्यरत सहायक अध्यापक का चयन हो गया।
प्राइमरी के अध्यापक बन गए जीआइसी के प्रधानाचार्य, जबकि यह है नियम
स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक सुधीर कुमार निषाद, शिक्षक विक्रम श्रीवास्तव, वंदना द्विवेदी, मंजू यादव और अनुदेशक अरुण पटेल व मंजू यादव की मेहनत से बच्चों ने यह उपलब्धि हासिल की है। कक्षा आठवीं के इन मेधावी बच्चों को 9 से 12 तक पढ़ाई के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये छात्रवृत्ति के रूप में मिलेंगे। खास बात यह कि स्कूल में पंजीकृत आठवीं के 58 छात्रों में से मात्र 17 ने फॉर्म भरा था। जिनमें से 6 के आवेदन निरस्त हो गए थे। यानि 11 बच्चों में से सात ने सफलता हासिल की है। जबकि शहर के एक बड़े निजी अंग्रेजी स्कूल के 200 बच्चों में से 15 को ही सफलता मिल सकी है। शिक्षक ब्रजेंद्र सिंह ने सफल छात्रों को शुभकामनाएं दी हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद के उच्च प्राथमिक विद्यालय मधेशा, कौड़िहार के सात बच्चों ने राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित परीक्षा (एनएमएमएस) में सफलता हासिल की है। पिछले दिनों परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से घोषित परिणाम में इस स्कूल के संदीप पटेल, अनुराग पटेल, धर्मराज मौर्य, शिव प्रताप सिंह, मानवेन्दु सिंह, राहुल गुप्ता और गौरव मौर्य ने जो उपलब्धि हासिल की है वह कई बड़े कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों को भी नहीं मिल सकी है।
एक परिषदीय स्कूल के सात बच्चे राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा में सफल
आंगनबाड़ी कार्यकत्री के लिए शैक्षणिक योग्यता कक्षा 10 पास मांगी गई है। इनका मानदेय 5500 रुपये है। जबकि सहायिका के लिए कक्षा आठ योग्यता व ढाई हजार रुपये मानदेय है। जिले में कुल 923 पदों का विज्ञापन हुआ था। आखिरी दिन जब आए आवेदन पत्रों की जांच शुरू हुई तो यह सच सामने आया। बीटेक करने वालों के आवेदन 500 से अधिक हैं, वहीं एमटेक करने वालों के 200 से अधिक आवेदन आए हैं। 500 से अधिक आवेदन एमबीए करने वालों के हैं। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो स्नातक और परास्नातक वाले हजारों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। यह संख्या अभी और बढ़ सकती है। क्योंकि अगले एक हफ्ते रजिस्टर्ड डाक से आवेदनपत्रों को मांगा गया है। विभाग के राजेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए बीटेक, एमटेक, एमबीए पास लोगों के तमाम आवेदन आए हैं। आखिरी दिन अब तक 18 हजार आवेदन विभाग के पास आ चुके हैं। शेष आए आवेदनों की स्क्रूटनी की जा रही है।
बेरोजगारी से परेशान युवाओं की मजबूरी का आलम यह है कि बीटेक-एमटेक और एमबीए करने वाली महिलाएं और युवतियां भी अब आंगनबाड़ी कार्यकत्री के लिए आवेदन कर रही हैं। इसका खुलासा हुआ आंगनबाड़ी कार्यकत्री व सहायिका भर्ती के आवेदन के आखिरी दिन। जब बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने आए आवेदनों की स्क्रूटनी का काम शुरू किया।
बीटेक-एमटेक वाले अब आंगनबाड़ी कार्यकत्री के लिए कर रहे आवेदन
अध्यक्ष रामसेवक पाल ने जानकारी देते हुए बताया शिक्षा मित्रों की मांग सरकार जब तक पूरी नहीं करेगी तब तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने चार सूत्री मांगों को लेकर विरोध जताया है। मृतक शिक्षामित्रों के परिवार को एक नौकरी प्रदेश सरकार से देने की भांग की है। गोंदलामऊ के लगभग सभी विद्यालयों में शिक्षामित्रों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान शुशील कुमार शुक्ला, अम्बादत त्रिपाठी, ओमप्रकाश राजवंशी, मनोज सिंह, सिधौली से गंगादीन बर्मा, रीनापाल, मिश्रिख से कुलदीप वर्मा, एलिया से कमलेश पाण्डेय, मछरेहटा से विनय सिंह आदि शिक्षामित्र मौजूद रहे।
(सीतापुर)। गोंदलामऊ इलाके के शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को सरकार पर बादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए काली पटीकर विरोध जताया। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के आश्थान पर विद्यालय में काली पट्टी बांधकर प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
शिक्षामित्रों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया
एफआईआर को निरस्त करवाने के लिए शुक्रवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिला। जिलाध्यक्ष आनन्द कुमार पाठक ने जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र से विषम परिस्थितियों का हवाला देते हुए शिक्षकों पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग की। जिला मंत्री विजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि कोरोना संक्रमित होने, स्वयं की शादी, गंभीर बीमार होने, छोटे बच्चे होने, अचानक बीमार होने, पति- पत्नी दोनों की ड्यूटी लगने पर किसी एक के ड्यूटी पर न पहुंच पाने आदि विषम परिस्थितियों के चलते शिक्षक शिक्षिकाएं निर्वाचन डयूटी पर नहीं पहुंच पाई थी और उन्हें अनुपस्थित मान लिया गया। शिक्षकों पर पयागपुर व देहात कोतवाली में एफआईआर दर्ज करा दी गई, जो न्यायोचित नहीं है। जबकि कई शिक्षकों ने डयूटी कटवाने के लिए मुख्य विकास अधिकारी व विभागीय अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिया था। जिलाधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र ने शिक्षक संघ के पदाधिकारियों की बातों को सुनकर बताए गए तथ्यों की जांच करवाकर नियमानुसार सही पाए जाने वाले शिक्षकों पर दर्ज एफआईआर निरस्त करवाने को आश्वासन दिया। प्रतिनिधि मंडल में विश्वनाथ पाठक, देवेंद्र सिंह, तनवीर आलम, भुवनेश्वर पाठक, बृजेश कुमार गुप्ता मौजूद रहे।
बहराइच:- त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव करवाने के लिए जिलेभर के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। निर्वाचन ड्यूटी के दौरान काफी संख्या में शिक्षक अनुपस्थित पाए गए थे। जिसके बाद जिला प्रशासन की ओर से नदारद शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
शिक्षकों पर दर्ज एफआईआर वापस हो, निर्वाचन कार्य संपन्न करवाने की जिम्मेदारी से विरत हुए थे शिक्षक
श्रावस्ती। आकांक्षी जनपद के कारण अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लाभ से वंचित शिक्षकों ने श्रावस्ती विधायक राम फेरन पाण्डेय को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में गृह जनपदों में स्थानांतरण की मांग की गई। शिक्षको न मांग की है कि आकांक्षी जनपदों से शिक्षकों का स्थानांतरण बिना किसी शर्त के किया जाय। दो -दो बार अन्य सभी जनपदों से बेसिक शिक्षकों का स्थानांतरण उनके गृह जनपद में किया गया, परंतु आकांक्षी जनपद श्रावस्ती के शिक्षकों को स्थानांतरण से वंचित रखा गया, जो न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों ने कहा कि विगत कई वर्षों से आकांक्षी जनपद के शिक्षक पूर्ण मनोयोग से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। जनपद में छह वर्ष से भी अधिक समय से शिक्षक अपने गृह जनपद और परिवार से दूर रहकर कार्य कर रहे हैं। वैश्विक महामारी के इस दौर में भी शिक्षक अपने घर परिवार के स्नेह व पारिवारिक उत्तरदायित्वों से वंचित रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें भी उनके गृह जनपद स्थानांतरित करके न्याय किया जाय। विधायक राम फेरन पाण्डेय व जिलाध्यक्ष संजय कैराती ने शिक्षकों की बात सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर रविशंकर पांडेय, स्वप्निल पांडेय, संजीवनी सिंह, प्रियंका मिश्रा, सुनीता यादव, अखिल गुप्ता, धीरज श्रीवास्तव, विकास मिश्रा, सविता, शैलजा राठौर, रत्नेश सिंह, सुनील सिंह, संध्या मिश्रा, सर्वेश यादव, हाकिम सिंह, सौरभ तिवारी, कृष्ण कुमार पांडेय, दिव्या भदौरिया, सुनीता, सुधा सिंह, पूनम सिंह, दीपा मिश्रा, नीलम, ज्योति चौहान, विभव मिश्रा,मनोज कुमार, वरुण मिश्रा, जयशंकर यादव आदि मौजूद रहे।
आकांक्षी जिलों में भी हो शिक्षकों का अंतर्जनपदीय स्थानांतरण, मांग
इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन एजुकेशन (आईएएसई) प्रयागराज स्तर से कम्पोजिट विद्यालयों में स्कूल नेतृत्व क्षमता संवर्द्धन कार्यक्रम की योजना तैयार की गई है। इसकी मदद से विद्यालय की चुनौतियों का समाधान कर प्रत्येक कम्पोजिट विद्यालय की कार्यात्मक प्रणाली को सुचारू रूप से सही दिशा में ले जाना है। इस कार्यक्रम के तहत प्रथम चरण में आईएएसई प्रयागराज ने कम्पोजिट विद्यालयों से संबंधित जानकारी एकत्र करने के लिए एक सर्वेक्षण शुरू किया है। यह सर्वेक्षण को पांच चरणों में होगा। हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में यह उपलब्ध है। संबंधित कम्पोजिट विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को सर्वेक्षण के तहत पूछे गए सभी प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जारी पत्र में प्राचार्य/ अपर शिक्षा निदेशक, आईएएसई प्रयागराज ने कहा है कि सूची से संबंधित कम्पोजिट विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निर्देशित करें कि वह ऑनलाइन सर्वेक्षण प्रपत्र को भरकर बीस जुलाई 2021 तक अनिवार्य रूप से भेज दें। इन प्रधानाध्यापकों के लिए टेलीग्राम एप डाउनलोड करना अनिवार्य है। इसकी मदद से एक ग्रुप का निर्माण किया जाएगा, जिस पर जरूरी जानकारियां साझा की जाएंगी।
बस्ती:- कम्पोजिट विद्यालयों में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर की कक्षाएं ही एक परिसर में संचालित करने की व्यवस्था बनाई गई है। इस दायरे में जिले के करीब तीन सौ परिषदीय स्कूल को संविलियन का दर्जा मिला है। प्राइमरी व उच्च प्राइमरी को एक साथ संचालित करने में आ रही विभिन्न विषमताओं को दूर करने के लिए विभाग ने पहल की है।
कंपोजिट विद्यालयों के हेडमास्टरों को अब देने होंगे सवालों के जवाब
एनआईसी की टीम 69000 भर्ती की तीसरी काउंसिलिंग में व्यस्त थी। इससे स्कूल आवंटन नहीं हो सका। इसी महीने पारस्परिक स्थानांतरण वाले शिक्षकों को स्कूल आवंटित किया जाएगा। - प्रताप सिंह बघेल सचिव बेसिक शिक्षा परिषद
कुछ शिक्षकों का निरस्त हुआ - तबादलाः पारस्परिक स्थानांतरण होने के बाद कुछ शिक्षकों का तबादला निरस्त करना पड़ा। दिसंबर 2019 में आवेदन के समय शिक्षकों ने एक से दूसरे जिले में जाने की सहमति दी थी। लेकिन जब तबादला आदेश जारी हुआ तो उन्होंने जाने से इनकार कर दिया। इस पर विभाग ने दूसरे शिक्षक का भी ट्रांसफर निरस्त कर दिया। प्रयागराज में 118 का तबदला हुआ था लेकिन 110 ने ही कार्यभार ग्रहण किया था।
एक जुलाई से स्कूल खुलने के बावजूद विभाग इन शिक्षकों को घर बैठाकर वेतन दे रहा है। अकेले प्रयागराज में 110 शिक्षक रोज बीएसए कार्यालय में उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
परिषदीय स्कूलों के हजारों शिक्षक पांच महीने से स्कूल आवंटन के लिए परेशान हैं। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों के 4868 शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों का अंतर जनपदीय पारस्परिक तबादला 17 फरवरी 2021 को किया गया था। उसके बाद शिक्षकों ने संबंधित जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अपनी ज्वाईनिंग दी। पिछले तकरीबन पांच महीने से ये शिक्षक बीएसए दफ्तर में हाजिरी लगाकर घर लौट जा रहे हैं।
पांच महीने से घर बैठाकर गुरुजी को दे रहे वेतन:- पारस्परिक तबादले के चार महीने बाद भी नहीं मिला स्कूल, बीएसए कार्यालय में हाजिरी
प्रयागराज:- 69000 शिक्षक भर्ती की तीसरी काउंसिलिंग के दो सप्ताह बाद भी नवचयनित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं हो सका है। तृतीय चयन सूची में शामिल 6696 सहायक अध्यापकों के दस्तावेजों की जांच 28 और 29 जून को हुई थी। 30 जून को नियुक्ति पत्र मिलना था लेकिन अचानक बिना कारण बताए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने नियुक्ति पत्र वितरण टाल दिया।
69000 Shikshak Bharti:- काउंसिलिंग के दो सप्ताह बाद भी तैनाती नहीं
स्कूल छोड़कर गायब रहने वाले शिक्षकों को चेतावनी दी गई थी। फिर भी सुधार नहीं देखा गया अब ऐसे शिक्षकों के सर्विस बुक में बैड इण्ट्री दी जाएगी। इसकी कार्यवाही शुरू की गई है। विनय मोहन वन, बीएसए
विभागीय गाइडलाइन का अनुपालन नहीं करने वालों पर होगी कार्रवाई विभागीय गाइडलाइन का पालन नहीं करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे ले जाना हर एक शिक्षक के लिए जरूरी किया गया है। मिशन प्रेरणा के तहत आवंटित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा कराया जाना जरुरी है। विभागीय नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। बताया जा रह है कि जिले के स्कूलों में शिक्षकों की खूब गैरहाजिरी हो रही है। ऐसे में शिक्षकों की रोजाना उपस्थिति सुनिश्चित करने में विभागीय अधिकारी जुटे हुए हैं। बीएसए ने जांच च निरीक्षण बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। विभाग के इस निर्णय से स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों के बीच खलबली का है। लोग अपने-अपने सूत्रों से गुणा गणित कौ सेटिंग में एक बार फिर जुट गए हैं।
गोण्डा:- लम्बे समय ये स्कूल से नदारद चल रहे। शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई हुई है। ऐसे दर्जन भर शिक्षकों के सर्विस बुक में बैड इण्ट्री दी जाएगी। जिसका असर आने वर्षों में प्रमोशन में बाधा के रूप में देखा जाएगा। मनमानी बरतने वाले शिक्षकों का बीएसए विनय मोहन वन ने कड़ी कार्रवाई की है। खण्ड शिक्षा अधिकारियों के रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आधा दर्जन शिक्षकों का वेतन पर रोक लगा दी गई है। मनमानी बरतने वाले ऐसे दर्जन भर शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस दी जा रही है। सही जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बीएसए ने बताया कि बीईओ आनन्द प्रकाश सिंह के निरीक्षण में कई शिक्षक गैर हाजिर पाए गए थे। वहीं कई जगह कायाकल्प योजना में अनियमितता का मामला सामने आया था ऐसे में इन मनमाने शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की गई है।
गैरहाजिर शिक्षकों को प्रतिकूल प्रविष्टि, मनमानी बरतने वाले शिक्षकों पर बीएसए ने की कार्रवाई
17 जुलाई 2021 की अब तक कि खबरें
क्या होगा एग्जाम पैटर्न : उत्तर प्रदेश लेखपाल भर्ती में अभ्यर्थियों से 100 नंबर के 100 प्रश्न पूछे जाएंगे और इसे हल करने के लिए उन्हें 90 मिनट का समय मिलेगा। इस परीक्षा में सामान्य हिंदी से 25 मार्क्स के 25 प्रश्न, गणित से 25 मार्क्स के 25 प्रश्न, सामान्य ज्ञान से 25 मार्क्स के 25 प्रश्न और ग्राम समाज एवं विकास विषय से 25 मार्क्स के 25 प्रश्न पूछे जा सकते हैं। अभ्यर्थियों को इस भर्ती से संबंधित जानकारी के लिए UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करते रहना चाहिए।
क्या हुआ है बदलाव :- UPSSSC द्वारा आयोजित होने वाली इस बार की लेखपाल भर्ती से इंटरव्यू हटा दिया गया है। लेखपाल भर्ती के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा में पहले इंटरव्यू भी शामिल होता था। लेकिन इस बार की भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू का आयोजन नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य में होने वाली पिछली लेखपाल भर्तियों में 100 नंबर की परीक्षा में से 80 नंबर की लिखित परीक्षा होती थी और 20 नंबर का इंटरव्यू आयोजित किया जाता था।
जान लें कौन करेगा लेखपाल भर्ती का आयोजन - उत्तर प्रदेश में इस बार लेखपाल के पदों पर भर्तियों का आयोजन UPSSSC करेगा। जबकि इससे पहले इन पदों पर भर्तियों का आयोजन दूसरे संगठन करते थे। UPSSSC द्वारा पहली बार आयोजित होने वाली इस भर्ती में कई बदलाव भी किए गए हैं। UPSSSC ने इस परीक्षा के लिए PET अनिवार्य कर दिया है। वहीं, इसका इस बार का एग्जाम पैटर्न भी बदला गया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन कमीशन (UPSSSC) पीईटी के बाद लेखपाल के 8000 से अधिक पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करेगा।राज्य भर के लाखों युवा लंबे समय में लेखपाल भर्ती का इंतजार कर रहे थे। अगर आप भी उनमें एक हैं तो आपको बता दें कि ये आपके लिए एक बहुत ही बढ़िया मौका साबित होगा। ऐसे में आपको आज से ही लेखपाल भर्ती के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश में UPSSSC जल्द ही लेखपाल के 8000 से अधिक पदों पर भर्तियां निकाल सकता है। UPSSSC द्वारा इस परीक्षा का आयोजन पहली बार किए जाने की वजह से इसके एग्जाम पैटर्न में कुछ बदलाव किया गया है। क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए लागू किए गए प्रीलिमिनरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (PET) के बाद प्रदेश में हजारों पदों के लिए लेखपाल की भर्तियां शुरू हो जाएंगी।
यूपी में लेखपाल के चयन में भारी फेरबदल, जानिए क्या हुआ बदलाव और क्या होगा इसका असर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संयुक्त क्‍्त प्रवेश परीक्षा बीएड में शामिल होने के लिए शनिवार तक यानी पिछले दो दिन में 2,78,917 अभ्यर्थी एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके हैं. राज्य समन्वयक प्रो. बाजपेयी ने बताया कि अगर किसी अभ्यर्थी को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में परेशानी हो तो वह लखनऊ विवि द्वास जारी ____*____ helplineupbed2021@gmail.com पर संपर्क कर सकता हैं। इसमें उन्हें अपना नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल, हाईस्कूल उत्तीर्ण करने का वर्ष और माता-पिता का नाम भेजना होगा।
बीएड प्रवेश परीक्षा : दो दिन में पौने तीन लाख एडमिट कार्ड डाउनलोड
लखनऊ : संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा के प्रवेश पत्र जारी किए जा चुके हैं। कई अभ्यर्थी आवेदन पत्र भरते के बाद अपनी पंजीकरण संख्या ही भूल गए, जिसकी वजह से प्रवेश पत्र डाउनलोड नहीं कर पा रहे। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय की हेल्पलाइन पर संपर्क किया, जिसके बाद अधिकारियों ने विस्तृत निर्देश भी जारी किए। राज्य समन्वयक प्रो, अमिता बाजपेयी ने बताया कि एंसे अभ्यर्थी जो किसी कारणवश पंजीकरण संख्या भूल गए हैं, वे अपनी ईमेल, जिसे उन्होंने अपने बीएड 2021-23 के आवेदन पत्र में भरा था, उससे भी प्राप्त कर सकते हैं। यदि उन्हें इस ई-मेल से पंजीकरण संख्या नहीं मिल रही तो उन्हें ई-मेल helplineupbed@gmail.com पर अपना विवरण भेजना होगा।
बीएड प्रवेश परीक्षा : अभ्यर्थी भूले पंजीकरण संख्या, फंसे प्रवेश पत्र
18 जुलाई 2021 की अब तक कि खबरें
उन्नाव: हाल ही में जिले को मिले नए बीएसए परिषदीय अध्यापकों पर निरीक्षण का शिकंजा कसे हुए हैं। शनिवार को फिर स्कूलों की जांच करने निकले बीएसए जय सिंह को एक विद्यालय में शासन के आदेशों के विरुद्ध अनियमितता मिली। बीएसए को विद्यालय में 20 बच्चे मिले। जबकि, फिलहाल कोरोना संक्रमण के कारण बच्चों की स्कूल में उपस्थिति नहीं होनी है।----*--- शनिवार को सिकंदरपुर कर्ण ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय सुपासी का बीएसए सिंह ने आकस्मिक निरीक्षण किया। जहां सशि शिवानी गुप्ता, आयुषी कटियार, शिक्षामित्र कौशल्या देवी उपस्थित रही। जबकि प्राशि जितेंद्र सिंह, सशि रेनू यादव, विनीता देवी व शिक्षामित्र स्नेहलता अनुपस्थित मिले। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई का हाल खराब व शौचालय गंदा पाया गया। किचन में आवश्यक सामग्री न मिलने व पत्र व्यवहार पंजिका में पांच अप्रैल के बाद कोई अंकन नहीं पाया गया। जिसकी सही सूचना न देने पर आयुषी कटियार को नोटिस देकर तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया गया। अनुपस्थित मिले पांच शिक्षकों का का वेतन काटा गया। प्रावि करौंदी का निरीक्षण करने पर प्राशि सुरेखा सिंह सहित पूरा स्टाफ उपस्थित मिला। सशि जगन्नाथ ने हस्ताक्षर बीएसए के सामने ही करने का प्रयास किया। जबकि, प्राशि ने सशि जगन्नाथ का हस्ताक्षर कालम रिक्त रखा था। साथ ही विद्यालय में अव्यवस्थाओं का मकड़जाल बिछा रहा और बच्चों की उपस्थिति का आदेश न होने पर 20 बच्चे स्कूल में पाए गए। बीएसए ने सशि का एक दिन का वेतन काटा है। ----अनुपस्थित मिले पांच शिक्षकों का भी बीएसए ने काटा वेतन ---->प्राथमिक स्कूल करौंदी में शासन आदेशों के विरुद्ध मिले बच्चे
स्कूल में मिले 20 बच्चे, शिक्षक का एक माह का वेतन रोका: शासन आदेशों के विरुद्ध मिले बच्चे
बलिया:- ज्ञापन देने पहुंचे शिक्षामित्रों से प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आप लोगों की नियुक्ति को अवैध करार दिया है लेकिन सरकार ने आप लोगों की सेवा को बरकरार रखा।---*-- आपके संगठन के नेता विपक्षी दलों के हाथों बिके हुए हैं। इसलिए हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं।बावजूद इसके आपकी समस्या मुख्यमंत्री के सामने रखूंगा। प्रभारी मंत्री ने कहा कि पहले होमगार्ड को महज चार से पांच हजार रुपये से संतोष करना पड़ता था। हमारी सरकार 21 हजार रुपये दे रही है ।
शिक्षा मित्रों के संबंध में बोले मंत्री जी, जानिए क्या कहा उन्होंने
शिक्षकों से लिए जाने वाले गैर शैक्षणिक कार्य - मतदाता सूची निर्माण व संशोधन प्रक्रिया, बाल गणना करना, मिशन प्रेरणा पोर्टल पर डाटा फीडिग करना, नवनिर्वाचित प्रधानों से समन्वय बनाकर कायाकल्प मिशन को गति देने काम, मिड-डे-मील के तहत खाते में फंड ट्रांसफर सुनिश्चित करना, मिड-डे मील के तहत राशन व खाद्य सामग्री एकत्र करना, भोजन बनवाना, राशन सार्वजनिक वितरण केंद्र पर अनाज वितरण करवाना, विद्यालय परिसर का दुरुस्तीकरण कराना, टाइम एंड मोशन स्टडी के अनुसार नए पंजीकरण कराने पर जोर, विद्यालय परिसर के विभिन्न अभिलेखों को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी, भवन निर्माण व देखरेख का काम, प्रसार-प्रसार के लिए बच्चों को लेकर विभिन्न रैलियों में शामिल करवाना। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्य में लगाए जाने से शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। हाईकोर्ट का यह आदेश स्वागत योग्य है। इसका सरकार को पालन कराना चाहिए। इसकी मांग संगठन ने सरकार से कई बार की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। - श्रीधर मिश्र, मंत्री, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
गोरखपुर। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को 13 तरह के गैर शैक्षणिक कार्य करने होते हैं। इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। इसी के मद्देनजर पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य नहीं कराना चाहिए। शिक्षक संघों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया था। यदि प्रदेश सरकार इस फैसले पर अमल करती है तो शिक्षकों को तीन ही कार्य करने के लिए ड्यूटी लगाई जा सकेगी। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले दिनों अपने एक फैसले में कहा था कि उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों से गैर शैक्षणिक काम नहीं करना चाहिए। अभी तक शिक्षकों से पढ़ाई के अलावा 13 तरह के अन्य कार्य लिए जाते हैं। शिक्षक संगठन बहुत दिनों से मांग कर रहे हैं कि शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य न कराया जाए, इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है। अब शिक्षक संगठनों को उम्मीद जगी है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सरकार उस पर अमल करते हुए शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य नहीं कराएगी। यदि ऐसा होता है तो जिले के कुल 2415 प्राइमरी स्कूलों के नौ हजार से अधिक शिक्षकों और तीन लाख 69 हजार विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।
बेसिक शिक्षकों से लिए जाते हैं 13 तरह के गैर शैक्षणिक कार्य
कोरोना संक्रमण के मद्देनजर हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा के 29.94 लाख और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के 26.10 लाख परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा के उत्तीर्ण करने का निर्णय लिया गया है। हाई स्कूल के परीक्षार्थियों को कक्षा-9वीं की वार्षिक परीक्षा और कक्षा 10वीं की प्री-बोर्ड परीक्षा के 50-50 प्रतिशत अंकों के आधार पर प्राप्तांक देकर परिणाम घोषित किया जाएगा। वहीं इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को 10वीं के 50 प्रतिशत, 11वीं की वार्षिक परीक्षा के 40 प्रतिशत और इंटरमीडिएट प्री-बोर्ड में प्राप्तांक का 10 प्रतिशत के आधार पर अंक देकर परिणाम घोषित किया जाएगा। बोर्ड के अधिकारी के अनुसार सरकार ने 25 जुलाई तक परिणाम घोषित करने के निर्देश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा-2021 का परिणाम 25 जुलाई तक आ जाएगा। परिषद में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर बिना परीक्षा के हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को उत्तीर्ण करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार परिणाम को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
25 जुलाई तक आएगा यूपी बोर्ड का रिजल्ट
पीसीएस-2018 के तहत प्रधानाचार्य के 83 पदों की भर्ती के मामले में उच्च न्यायालय ने आयोग से कहा था कि अपने विज्ञापन का पालन करें और रिजल्ट संशोधित करें। इस मामले में आयोग सुप्रीम कोर्ट तक गया, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने आयोग की एसएलपी खारिज कर दी। आरओ/एआरओ-2016 की भर्ती को लेकर भी ऐसा ही विवाद है, जिसमें अभ्यर्थियों ने न्यायालय में याचिका दाखिल कर रखी है।--*-- आरओ/एआरओ-2016 का विज्ञापन वर्ष 2016 में जारी किया गया था। परीक्षा में शामिल होने के लिए तीन लाख 85 हजार 122 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। नवंबर-2016 में आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के दौरान लखनऊ के एक सेंटर से प्रश्रपत्र व्हाट्सएप पर वायरल हो गया था। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने लखनऊ के एक थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। --*-- बाद में पेपर लीक मामले की सीबीसीआईडी जांच हुई और इसमें पेपर लीक के कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। आयोग प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी करता, इससे पहले अमिताभ ठाकुर ने न्यायालय में वाद दाखिल कर दिया। आयोग ने मामले को खत्म करने के लिए प्रारंभिक परीक्षा को ही निरस्त कर दिया और 20 सितंबर 2020 को प्रारंभिक परीक्षा दोबारा कराई। वर्ष 2016 के विज्ञापन में निगेटिव मार्किंग नहीं थी, जबकि आयोग ने दोबारा हुई प्रारंभिक परीक्षा में निगेटिव मार्किंग लागू कर दी।-*- आयोग का तर्क था कि वर्ष 2019 से यूपीपीएससी की सभी परीक्षाओं में निगेटिव मार्किंग लागू की गई है। आरओ/एआरओ-2016 की प्रारंभिक परीक्षा वर्ष 2019 के बाद ही रही है, इसी वज हसे निगेटिव मार्किंग लागू की गई है। वहीं, अभ्यर्थियों का कहना था कि वर्ष 2016 में जारी विज्ञापन के तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को ही परीक्षा में शमिल होने का मौका दिया गया है। नया विज्ञापन या आवेदन तो हुआ नहीं। ऐसे में आयोग विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन नहीं कर सकता। --*-- अभ्यर्थियों की मांग, निरस्त की जाए परीक्षा- आरओ/एआरओ-2016 के अभ्यर्थियों की मांग थी कि परीक्षा में निगेटिव मार्किंग लागू न की जाए। इस मामले में श्रीति सिंह ने कोर्ट में यचिका भी दाखिल कर रखी है। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह का आरोप है कि आयोग ने विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए प्रारंभिक परीक्षा कराई और कुछ माह पूर्व अंतिम चयन परिणाम भी जारी कर दिया। कौशल सहित तमाम प्रतियोगी छात्रों की मांग है कि आयोग पूरी परीक्षा निरस्त करे और बिना निगेटिव मार्किंग के नए सिरे से प्रारंभिक परीक्षा कराए।--*-- आरओ/एआरओ के 260 पदों पर हुआ था चयन -- समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ)-2016 के तहत आठ प्रकार के 260 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। हालांकि परीक्षा 303 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी, लेकिन योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण 43 पद खाली रह गए थे। पेपर लीक विवाद के कारण यह भर्ती पांच साल में पूरी हो सकी थी।
पीसीएस-2018 के तहत प्रधानाचार्य के पदों पर भर्ती के विवाद को लेकर घिरे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के लिए समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2016 को लेकर भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विज्ञापन की शर्तों के विपरीत आयोग ने आरओ/एआरओ-2016 की प्रारंभिक परीक्षा में निगेटिव मार्किंग लागू कर दी थी, जबकि कुछ दिनों पहले ऐसे ही एक अन्य मामले में विज्ञापन की शर्तों के विपरीत भर्ती करने पर आयोग को अब प्रधानाचार्य के पदों का परिणाम संशोधित करना पड़ रहा है।
समीक्षा अधिकारी /सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा-2016 को लेकर भी घिरा आयोग
राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2021-22 के संबंध में दिए गए निर्देशों में इसकी घोषणा की गई है। आदेश के मुताबिक इसके लिए बीएसए को स्थलीय सत्यापन कराकर राज्य परियोजना कार्यालय को अपना प्रस्ताव भेजना होगा। ये मॉडल स्कूल अन्य स्कूलों के लिए प्रेरणास्त्रोत का काम करेंगे। इन मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को विज्ञान, गणित एवं लैंग्वेज लैब, डिजिटल क्लासरूम, व्हाइट बोर्ड, स्टॉफ व बच्चों के लिए फर्नीचर, टाइल्स, शौचालय, खेल सामग्री, वॉटर कूलर, झूले, शैक्षिक व अन्य खिलौने आदि की सुविधाएं दी जाएंगी। प्रधानाध्यापकों को भी स्कूल चलाने का तौर तरीका सिखाया जाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन एजुकेशन कंपोजिट विद्यालयों में स्कूल नेतृत्व, क्षमा संवर्द्धन कार्यक्रम की योजना तैयार कर रहा है। जिसके तहत प्रधानाध्यापकों को विद्यालय की कार्यात्मक चुनौतियों का समाधान करना और प्रत्येक कंपोजिट विद्यालय में कार्यात्मक प्रणाली को सुचारु रूप से सही दिशा की ओर ले जाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। --*-- शासन की ओर से विद्यालय के चयन के लिए रिपोर्ट मांगी गई है, उसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है। रिपोर्ट आने के बाद शासन को अवगत कराया जाएगा। - राकेश सिंह, बीएसए
निजी स्कूलों की तर्ज पर जिले के परिषदीय स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में संवारा जा रहा है। अब इस श्रेणी में अंग्रेजी माध्यम के कंपोजिट विद्यालयों को भी मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। जिले में 1144 परिषदीय स्कूलों में 220 कंपोजिट विद्यालय (एक ही परिसर में प्राथमिक व जूनियर) हैं।
परिषदीय कंपोजिट विद्यालयों को बनाया जाएगा मॉडल स्कूल
19 जुलाई तक -*- जेपीनगर, मुरादाबाद, रामपुर, संभल शाहजहांपुर, पीलीभीत, बरेली, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, प्रयागराज कौशांबी, संत रविदास नगर, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोरखपुर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, ---- 20 जुलाई तक-*- बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर संभल, जेपीनगर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बंदायू, अलीगढ़, मथुरा, महामाया नगर, फर्रुखाबाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बांदा, चित्रकूट। ---- 21 जुलाई तक --*-- शाहजहांपुर, पीलीभीत, बरेली, संभल, महाराजगंज, लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, फर्रुखाबाद, बंदायू, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, मुरादाबाद, रामपुर व आसपास।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। जारी अलर्ट में इन जिलों को भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम बुलेटिन के मुताबिक इस दौरान बिजली और यातायात व्यवस्था पर असर बड़ सकता है। रविवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक, 21 जुलाई तक इन जिलों में भारी बारिश से परेशानी हो सकती है।
यूपी के कई जिलों में बुधवार तक भारी बारिश की चेतावनी, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट किया जारी
प्रयागराज:- प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में तबादले के लिए 6852 शिक्षकों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराए और इनमें से महज 1994 शिक्षक (29.10 फीसदी) शिक्षक ही आवेदन कर पाए थे। शेष लोगों के पद ही नहीं थे और विद्यालय लॉगिन नहीं हो रहे थे। रविवार को अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक शिक्षक महासभा की सलोरी स्थित काटजू बाग कॉलोनी में इस मसले पर हुई बैठक में ऑनलाइन तबादला नीति पर रोष व्यक्त किया गया। बैठक में शामिल शिक्षकों ने दावा किया कि आवेदन से वंचित रह जाने वालों में अधिकांश शिक्षक अनुसूचित जाति, एवं जनजाति, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। शिक्षक महासभा सरकार से मांग करती है कि उन्हें फॉर्म भरने का पुनः मौका दिया जाए एवं आरक्षण के नियमों का पूर्णतया पालन किया जाए, अन्यथा शिक्षक महासभा न्यायालय जाने के लिए बाध्य होगी।
शिक्षक तबादले के लिए रजिस्ट्रेशन 6852, पर आवेदन 29 फीसदी
प्रयागराज :- उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की ओर से रविवार को राज्य महिला आयोग की सदस्य अनामिका चौधरी को ज्ञापन देकर मांग की गई कि प्रदेश में कार्यरत महिला शिक्षकों को तीन दिन की पीरियड लीव दी जाए। कहा कि उन दिनों महिलाओं की मानसिक एवं शारीरिक स्थित सामान्य दिनों से अलग होती है। उन्हें आराम की जरूरत होती है। भारतीय संविधान के तहत सरकार कर्मचारी महिलाओं और युवतियों के कल्याण के लिए विशेष उपबंध कर सकती हैं। ऐसा बिहार सरकार पिछले 30 वर्षों से कर रही है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्य, जिला अध्यक्ष वीथिका अमरनाथ, महामंत्री अपर्णा बाजपेई, पूनम गुप्ता, दुर्गावती मिश्रा, इंदु शर्मा ने अनामिका चौधरी को स्मृति चिह्न भी भेंट किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री को इस बारे में अवगत कराएंगी।
शिक्षिकाओं ने मांगा तीन दिन का विशेष अवकाश
लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने एक ही परिसर में कार्य करने वाले शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, विशेष शिक्षक, रसोइया व केजीबीवी के शिक्षकों की 21 सूत्री मांगों को लेकर सरकार को ज्ञापन भेजा है। संघ के अध्यक्ष डॉ दिनेश शर्मा ने चेतावनी दी कि समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो राजधानी में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इसको लेकर शिक्षकों ने ट्विटर पर अभियान चलाया। संगठन का दावा है कि मांगों के समर्थन में करीब 10 लाख ट्वीट किए गए अभियान में महामंत्री संजय सिंह, कोषाध्यक्ष शिव शंकर पांडे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधे रमण त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष सुधांशु मोहन व जिला मंत्री वीरेंद्र सिंह ने सक्रिय भूमिका निभाई।
प्राथमिक शिक्षक संघ ने ट्विटर पर चलाया अभियान, किया यह दावा
लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद का नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए चार महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी तक बच्चों के हाथों में किताबें नहीं आई हैं। यह स्थिति तब है जब शासन ने हर हाल में जुलाई में बच्चों को किताबें उपलब्ध कराने का दावा किया था। कोरोना काल में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई ज्यादा काम नहीं आ रही। बच्चे स्कूल जाकर शिक्षकों से पूछते हैं कि हमारी किताबें कब मिलेंगी। शिक्षक जितना हो सके बच्चों से पुरानी किताबें लेकर पिछली कक्षा के बच्चों को असाइनमेंट दे रहे हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के बच्चों को विभाग की तरफ से निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। नया सत्र अप्रैल में शुरू हो गया था, चार महीने होने आए अभी तक विभाग बच्चों को किताबें उपलब्ध नहीं करा पाया है। जिले में करीब डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चे परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। मिशन प्रेरणा के तहत ई- पाठशाला संचालित कर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों को ई-कंटेंट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दूरदर्शन पर कक्षाएं प्रसारित की जाती हैं। दीक्षा एप के माध्यम से भी ऑडियो-वीडियो ई-कंटेंट उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के पास ऐसे संसाधन नहीं हैं जिसके माध्यम से वे ई-पाठशाला का लाभ उठा सकें। एक अनुमान के मुताबिक केवल तीन प्रतिशत छात्र ही ऑनलाइन माध्यम से जुड़े हैं। बाकी सभी बच्चे ऑनलाइन पाठशाला से दूर हैं। ऐसे में बच्चों को किताबों की बेहद जरूरत महसूस की जा रही है।-----*--- किताब के लिए स्कूल आते हैं बच्चे -- शिक्षकों ने बताया कि नई किताबों की चाह लेकर बच्चे विद्यालय में चले आते हैं। आसपास के बच्चे ही परिषदीय विद्यालयों में पढ़ते हैं। वे अक्सर विद्यालय में पहुंचकर शिक्षकों से सवाल करते हैं कि हमारी किताबें कब मिलेंगी। शिक्षकों ने बताया कि अपने स्तर से काफी बच्चों को पुरानी किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। अभिभावकों को बुलाकर अगली कक्षा में गए बच्चों की पुरानी किताबें उपलब्ध कराई गई। अभिभावकों को बुलाकर असाइनमेंट और वर्कशीट दी जाती है। लेकिन अभिभावक भी पूछते हैं कि नई किताबें कब मिलेंगी ताकि बच्चे किताबों से पढ़ना शुरू कर सकें। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन उप्र के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि नया सत्र शुरू हुए चार महीने का समय हो चुका है और बच्चे ई-पाठशाला और ऑनलाइन के माध्यम से पढ़ाई करने को बाध्य हैं। अभी तक पाठ्य पुस्तकें ब्लॉक संसाधन केंद्र तक नहीं पहुंची हैं। पहले यहां आएंगी फिर विद्यालय पहुंचेंगी और बाद में अभिभावकों को वितरित की जाएगी।----*---- 40 प्रतिशत किताबें आ चुकी हैं। शनिवार को पदभार ग्रहण करने के बाद सत्यापन के लिए। समन्वयकों को निर्देश देते हुए कमेटी का भी गठन कर लिया है। इस हफ्ते किताबों का सत्यापन कर लिया जाएगा और वितरण के लिए भेजना शुरू कर देंगे। - विजय प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ
चार माह बाद भी बच्चों हाथों में किताबें नहीं, कैसे करें पढ़ाई:- परिषदीय विद्यालयों का हाल
लखनऊ। स्कूलों को ऑफलाइन पढ़ाई के लिए खोले जाने को लेकर निजी स्कूलों का संगठन अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन सरकार से फिर वार्ता करने जा रहा है। संगठन ने डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा को प्रस्ताव देकर 19 जुलाई से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू कराने की मांग की थी। अभी शासन की तरफ से इसको लेकर कोई निर्देश नहीं आया है। संगठन ने डिप्टी सीएम से इस संबंध में वार्ता करने के लिए समय भी ले लिया है।--- ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करने के लिए निजी स्कूलों का संगठन एक बार फिर से डिप्टी सीएम से वार्ता करेगा। अध्यक्ष डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि प्रस्ताव में 19 जुलाई से कक्षाएं शुरू करने की मांग की थी। डिप्टी सीएम से मिलकर इसी माह में ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करने की मांग की जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले चरण में कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करने की मांग की गई थी। वार्ता कर कक्षा 10 और 12 के छात्रों की कक्षाएं प्राथमिकता पर शुरू कराने की मांग रखी जाएगी।--- निजी स्कूलों में 54 प्रतिशत से ज्यादा अभिभावकों की सहमति - ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करने के लिए निजी स्कूल भी अभिभावकों को सहमति पत्र भेज रहे हैं। स्कूलों ने अपने स्तर से सर्वे भी कराया है। अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि निजी स्कूलों में 54 फीसदी से ज्यादा अभिभावक छात्रों को स्कूल भेजने पर राजी हैं। उन्होंने बताया कि अभिभावकों पर भी ऑनलाइन पढ़ाई बोझ बनती जा रही है और उन्हें अब ऐसा महसूस होने लगा है कि बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही है। इन सभी बातों व अभिभावकों की सहमति को भी वार्ता के समय रखा जाएगा।
स्कूल खोलने के लिए फिर वार्ता, डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा से लिया समय
लखनऊ। बच्चों की आवाज को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए विकास नगर के पार्क में एक मूक प्रदर्शन सोमवार को होगा। जिसमें स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर बच्चे स्कूल खोलने की मांग करेंगे। बच्चों का कहना है कि माल, रेस्तरां व बाजार सब खुले हैं तो सिर्फ बच्चों को क्यों बन्द रखा गया है। कोविड नियम के अनुशासन का ध्यान रखते हुए चरणबद्ध तरीके से शिफ्टों में स्कूल खोले जाये। बच्चों की इच्छा एवं आवश्यकता का ध्यान रखते हुए चरणबद्ध तरीके से शिफ्टों मे स्कूल शीघ्र खोलने पर विचार करने की मांग मुख्यमंत्री से की जायेगी।
स्कूल खोलने की मांग को लेकर आज होगा प्रदर्शन
ई -पाठशाला के अंतर्गत दूरदर्शन पर आज दिनाँक 19.07.2021 को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा
कस्तूरबा विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए विज्ञापन जिले द्वारा किया गया जारी, क्लिक कर देखें जिले का नाम व विज्ञप्ति
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी होते हुए दूसरी महिला के साथ लिव इन रिलेशन में रहने वाले सरकारी कर्मचारी की सेवा से बर्खास्तगी को गलत करार दिया है। कोर्ट ने माना कि सेवा से बर्खास्तगी एक कठोर दंड है। बर्खास्तगी को रद़द करते हुए कोर्ट ने कहा है कि याची को सेवा में फिर से बहाल किया जाए और विभाग चाहे तो इूसरा कोई मामूली दंड दे सकता है। गोरेलाल वर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने यह आदेश दिया है। याचिका में कहा गया कि गोरेलाल का विवाह लक्ष्मीदेवी से हुआ है जो कि जीवित है, मगर वह हेमलता वर्मा के साथ लिव इन रिलेशन में रहता है और दोनों को तीन बच्चे भी हैं। इस आधार पर 31 अगस्त 2020 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश के खिलाफ उसने विभागीय अपील दाखिल की । अपील भी खारिज कर दी गई। विभाग का मानना है कि उसका यह कार्य सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 और हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। याची के अधिवक्ता की दलील थी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनीता यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के केस में इस प्रकार के मामले में बर्खास्ती का आदेश रद़द कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट ने एसएलपी खारिज कर दी थी। याची भी इसका लाभ पाने का हकदार है। कोर्ट ने याची की दलील को स्वीकार करते हुए याची की बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए उसे सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। मगर कोर्ट ने कहा है कि याची बर्खास्तगी अवधि का वेतन पाने का हकदार नहीं होगा।
शादी शुदा होते हुए भी लिव इन रिलेशन में रहने पर सरकारी नौकरी से बर्खास्तगी गलत: कोर्ट
प्रयागराज : बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली ने प्रधानाध्यापकों की मुश्किलें बढ़ा दी है। बिना संसाधन उपलब्ध कराए प्रेरणा पोर्टल पर डेटा फीडिंग के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए टैबलेट, कंप्यूटर, डाटा आदि मुहैया कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे शिक्षकों में असंतोष है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि तकनीकी रूप से जानकार लोगों की मदद ली जाए। -*- प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के महामंत्री अजय सिंह ने बताया कि फीडिंग, ट्रेनिंग सहित सभी विभागीय कार्य डिजिटल हो रहे हैं। प्रधानाध्यापकों को इस संबंध में कोई भी संसाधन उपलब्ध नहीं कराया गया है। जो भी कार्य हो रहा है शिक्षक अपने स्तर से करने को विवश हैं। प्रेरणा पोर्टल पर किए जाने वाले कार्य : शिक्षक नेता ब्रजेंद्र सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार प्रेरणा पोर्टल पर विद्यार्थियों का पूरा विवरण अपलोड होना है। ई पाठशाला की सामग्री पोर्टल से निकालकर अलग अलग ग्रुपों में प्रतिदिन पोस्ट करने जैसे कार्य किए जाने हैं।--*-- डेटा से मिलान न होने पर कठिनाई - शिक्षकों का कहना है कि आनलाइन फीडिंग के लिए फोन, नेटवर्क, डेटा व पर्याप्त समय चाहिए। इसके अतिरिक्त छात्रों का रिकार्ड सत्य होना चाहिए। इससे पहले जो विवरण विद्यालय में हैं उसे फीड डेटा से मैच करना चाहिए। यदि वह मेल नहीं खाएगा तो डाटा अपलोड नहीं होगा।
पोर्टल पर फीडिंग गुरु जी के लिए सिरदर्द, डेटा से मिलान न होने पर कठिनाई
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69000 शिक्षक भर्ती के दो चरण पूरे हो चुके हैं। प्रदेश भर में करीब 63 हजार से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति के बाद 6696 पद खाली थे। विभाग ने जून माह में इन पदों के लिए सभी जिलों में काउंसिलिंग कराई और 30 जून को नियुक्ति पत्र देने का निर्देश था। परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने उसे स्थगित कर दिया था और कहा था कि नई तारीख जल्द घोषित होगी, तब से चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति पाने का इंतजार कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी देरी की वजह पंचायत चुनाव व राष्ट्रपति का दौरा बता रहे हैं। अफसरों का कहना है कि मुख्यमंत्री कुछ चयनितों को नियुक्तिपत्र देंगे, वहीं जिलों में जनप्रतिनिधि वितरण करेंगे। ऐसे में पत्रावली सीएम के यहां लंबित है, वहां से निर्देश मिलते ही तारीख का ऐलान कर दिया जाएगा। नियुक्तिपत्र इसी माह दिए जाने की तैयारी है।
लखनऊ : पंचायत चुनाव की वजह से परिषदीय प्राथमिक स्कूलों के लिए चयनित 6696 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका है। बेसिक शिक्षा विभाग जिला पंचायत चुनाव से पहले जिलों में काउंसिलिंग करा चुका है लेकिन, नियुक्तिपत्र वितरण रोक दिया था। नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी ब्लाक प्रमुख चुनाव कार्यक्रम फिर बाधा बना । अब चयनितों को नियुक्तिपत्र जल्द मिल सकेगा।
प्राथमिक विद्यालयों 6696 परिषदीय शिक्षकों को नियुक्ति पत्र का इंतजार
बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय शिक्षकों के रिक्त पदों के सापेक्ष और पारस्परिक अंतर जिला तबादले किए थे। पारस्परिक तबादला सूची करीब पांच माह पहले आ चुकी है लेकिन कई जिलों में शिक्षकों को अब तक स्कूल आवंटन नहीं किया जा सका है, इससे सभी परेशान हैं। अफसरों का कहना है कि प्रक्रिया आनलाइन होनी है और जल्द ही कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
पारस्परिक तबादला प्राप्त शिक्षकों को विद्यालय हेतु जल्द ही कार्यक्रम जारी किया जाएगा
राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पांडेय ने बताया कि राजकीय इंटर कालेज में आनलाइन स्थानांतरण के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसी क्रम में 18 महिला संवर्ग की शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया। इसके लिए पुरुष संवर्ग के शिक्षकों ने भी आवेदन किया था, उनकी सुनवाई नहीं हुई। विद्यालय के सभी प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों की मांग है कि महिला संवर्ग की शिक्षकों को उनके संवर्ग के विद्यालय में समायोजित किया जाए। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) के खिलाफ शिक्षा निदेशालय पर धरना प्रदर्शन करेंगे।
प्रयागराज : जीआइसी में 18 महिला शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिया गया है। इससे शिक्षकों में रोश है। उनका कहना है कि पुरुष संवर्ग के विद्यालय में महिला शिक्षकों को भेजना गलत है जब कि स्थानांतरण की मांग करने वाले पुरुष शिक्षकों के आवेदन पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
पुरुष संवर्ग के विद्यालय में महिला शिक्षकों का तबादला करने से रोष
आवेदन की अंतिम तारीख 31 अगस्त है। अभ्यर्थियों की कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा होगी।इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा व मेडिकल टेस्ट कराकर चयन किया जाएगा। --- यह है पदों का ब्योरा • बीएसएफ में 6413 पुरुष, 1132 महिला । ●सीआइएसएफ में 7610 पुरुष, 854 महिला । • एसएसबी में 3806 पुरुष । • आइटीबीपी में 1216 पुरुष व 215 महिला । • असम राइफल्स में 3185 पुरुष व छह सौ महिला । • एसएसएफ में 194 पुरुष व 46 महिला यह है खास • 31 अगस्त आनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख • दो सितंबर आनलाइन फीस जमा करने की अंतिम तारीख | • चार सितंबर आफ लाइन चालान जमा करने की अंतिम तारीख। • सात सितंबर चालान के माध्यम से फीस जमा करने की अंतिम तारीख।
प्रयागराज : कोरोना काल के निराशा भरे माहौल में कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने युवाओं को बड़ी सौगात दी है। एसएससी ने केंद्रीय सुरक्षा बलों में कांस्टेबल जीडी यानी जनरल ड्यूटी की हजारों पदों की भर्ती निकाली है। कांस्टेबल जीडी के जरिये बीएसएफ, सीआइएसएफ, एसएसबी, आइटीबीपी, एसएसएफ व असम राइफल्स में 25,271 पदों की भर्ती की जाएगी। इसमें महिलाओं के 2,847 व पुरुषों के 22,424 पद निर्धारित हैं। भर्ती को शीघ्र निस्तारित करने के लिए आनलाइन आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अभ्यर्थियों को एसएससी की वेबसाइट में आनलाइन आवेदन करना होगा।
एसएससी ने निकाली 25,271 पदों के लिए कांस्टेबल भर्ती, यह है पदों का ब्योरा
बलरामपुर:- अंतर्जनपदीय तबादले को लेकर जिले के परिषदीय शिक्षकों ने रविवार को राजधानी कूच कर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को ज्ञापन सौंपा। अंतर्जनपदीय तबादले को लेकर जिले में कार्यरत परिषदीय शिक्षक विनोद वर्मा, पायल अरोड़ा, सरिता, धीरज राहुल श्रीवास्तव, पुष्पा वर्मा, संजीवनी सिंह, दिव्या भदौरिया, रीना कौशिक, सुनीता यादव, रश्मि व रजनीश वर्मा आदि शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात की। शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आकांक्षी जिला बलरामपुर घोषित होने से शिक्षकों का तबादला रुका हुआ है। अंतर्जनपदीय स्थानांतरण न होने से मूल जनपद वापसी शिक्षकों का अवरुद्ध है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता, सास-ससुर व बच्चे घर से दूर होने के कारण उनकी देखभाल में काफी समस्याएं आ रही हैं।
अंतर्जनपदीय तबादलों की मांग को लेकर शिक्षकों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा
नई शिक्षा नीति के अनुरूप माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में बदलाव शुरू हो गए हैं। बोर्ड अब अपने छात्रों के रिपोर्ट कार्ड को भी बदलने जा रहा है। 360 डिग्री के आधार पर आकलन कर छात्र को कक्षा 6 से 12वीं तक की मार्कशीट दी जाएगी।
यूपी बोर्ड के रिपोर्ट कार्ड में नए सत्र से कई बदलाव, नई शिक्षा नीति के अनुसार तैयार की गई मार्कशीट
19 जुलाई 2021 की अब तक कि खबरें